भारत की हर उठती समस्या का कारण है हमारा पल पल बदलता नजरिया

{कोपल श्रीवास्तव }
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा" ये बोल जब हमारे कानों में पड़ते हैं तो हमारा रोम रोम भारतीय होने के गौरव से महक उठता है। पर अफ़सोस की बात ये है की अपने भारतीय होने पर गर्व करने के लिए हमें प्रेरित होने के लिए फिल्मों या प्रेरणा से भरी हुई देशभक्ति कविताओं की ज़रूरत पड़ती है. आज देश की हालत के लिए हम चाहे किसी को भी जिम्मेदार ठहरा दें, पर हमारा अंतर्मन इस बात को स्वीकारता है की हम अपने देश की आत्मा से कहीं दूर निकल गए है. इस तरह अपनी मात्रभूमि के एहसास से दूर होने की वजह कुछ भी हो, परन्तु ये एक कड़वा सत्य है कि, हमारे पास अपने देश कि हालत के लिए समाज, नेताओं व आतंकवाद को दोष देने के लिए वक़्त है, परन्तु आत्मीयता से अपने राष्ट्र कि समस्याओं को सुलझाने के बारे में सोचने का कहीं किसी के पास वक़्त नहीं है
हमारा देश हर तरफ से समस्याओं से घिरा हुआ है, ये समस्याएं आर्थिक भी है और सामाजिक भी. राजनितिक मुद्दे तो हर समस्या का आधार ही बन कर रह गए हैं. परन्तु मेरी नज़र में भारत की सबसे बड़ी समस्या भारतीयों का अपने देश के सन्दर्भ लापरवाही से भरा हुआ नजरिया है. हर कोई भ्रष्टाचार की धूनी रमा रहा है, तो कोई विदेशों की महिमा के गीत गा रहा है, युवाओं को नशे में धुत्त रहने और रटे-रटाये रस्ते पर चलने के आलावा कोई काम ही नहीं है.
आज हर भारतवासी, भारतीय होने से पहले मराठी, पंजाबी और हरयाणवी हो गया है. सरहदों पर लकीरें खींचने में फिरंगी कामयाब रहे और अब घर के आँगन में लकीर खींचने के लिए मतलबी राजनीतिज्ञ तत्पर हैं. हम क्या कर रहे हैं....युवा वर्ग होने के नाते अपने राष्ट्र के लिए लाखों जिम्मेदारियां बनती हैं, पर हमारे पास अपनी बेनाम ज़िन्दगी जीने के आलावा कोई काम ही नहीं है.
आज अगर सवाल ये उठाया जाता है की भारत के सामने सब से बड़ी समस्या क्या है तो सब अपना मत रखना शुरू करेंगे और ये तय है की निम्नलिखित समस्याओं के अलावा कोई समस्या नहीं लिख पाएंगे...
भ्रष्टाचार
सामाजिक समस्याएं
आर्थिक समस्याएं
राजनितिक समस्याएं
आतंकवाद
धार्मिक समस्याएं.
परन्तु मैं यहाँ पे सिर्फ ये मुद्दा उठाना चाहती हूँ कि, ये समस्याएं सिर्फ उस अमर बेल कि शाखाएं मात्र हैं जो हमारे देश को दिन रात ख़त्म करने में अग्रसर है. हमें इसकी जड़ तक जाना चाहिए और इस अमरबेल कि जड़ कुछ और है. यानि सब समस्याओं का आधार कुछ और है . और वो आधार है हमारा सोचने का नजरिया और हमारे दिलों से पल पल मिटती भारतीयता.
अब फैसला हमारा है. हमें तय करना है कि हमें हमारी जिम्मेदारियां कैसे निभानी है या हमेशा कि तरह आँखें मूँद कर चलते रहना है.
जय हिंद.